सुन्दर छवि की परिचायक होती है शिकायते सन्त कबीर नगर - चूंकि शिकायत एक सुन्दर छवि वाली प्रक्रिया है जिसके कईं रूप हो सकते है बतौर उदाहरण अगर किसी झगड़े टंटे की शिकायत है तो इसकी मूल वजह को देखते हुए निस्तारित किया जाता है यहां न्याय की प्राथमिकता होती है वही अगर शिकायत विकास कार्यो मे अनियमितता को लेकर होती है तो यहां उस दायित्व की प्राथमिकता होती है जो जनहित मे होता है । लेकिन जैसे इसकी महत्ता को परिवर्तन की जरूरत आन पड़ी है लोकतांत्रिक रूप से मिले संवैधानिक अधिकार का दुरूपयोग करते हुए कुछ अनियमितता की शिकायत कर्ताओ द्वारा इसके मायने बदले जा रहे है । मसलन ग्राम पंचायतो मे हुए विकास कार्यो को लेकर सरकारी धन का बंदरबाट की हो रही शिकायतो पर जहां ऐसे इमानदार अधिकारी के जांच रिपोर्ट को शिकायत कर्ता गलत रिपोर्ट लगाने का इल्जाम लगा रहे है जिनकी कर्त्तव्य परायणता एक पहचान है जिससे एक तरफ लोग जहां जांच से डरते है तो वही दूसरी तरफ सबक लेते है । वही दूसरी तरफ शिकायत कर्ता स्थलीय जांच रिपोर्ट की आख्या को छुपा कर तथाकथित मीडिया से मिलकर सालो बाद कार्यवाई न होने का हवाला देते हुए हजार नही लाख नही करोड़ो सरकारी धन बंदरबाट की खबर चलवायी जा रही है । बतौर उदाहरण विकास खण्ड सांथा के मुड़िला कला मे विगत दिनो से तथाकथित पत्रकारो द्वारा अपनी नीयत से समझौता कर दायित्व का हनन किया जा रहा है । वही विकास खण्ड सेमरियावा के ग्राम पंचायत बन्नी के शिकायत कर्ता द्वारा ईमानदारी से की गयी जांच अधिकारी की क्रमशः डी पी आर ओ , विकास भवन जेई सुशील मिश्रा , ए डी ओ पंचायत शशि भूषण पाण्डेय सेमरियावा , अधिशासी अभियंता नलकूप खण्ड लालचन्द सहायक अभियंता ड्रेनेज खण्ड सतीश चन्द , बी डी ओ आर के चतुर्वेदी सेमरियावा , पी डी प्रमोद यादव व छठवी जांच डी डी ओ राजित राम मिश्रा के जांच पर असंतुष्ट का मोहर मारकर किसी सक्षम एजेन्सी अथवा एस आई टी जांच करवाने बाबत समाधान दिवस मे प्रार्थना पत्र देकर जिलाधिकारी से जांच कराने का गुहार लगाया है । ऐसे मे यह देखना जरूरी हो गया है कि शिकायत की मूल वजह अनियमितता है या कुछ और ? चूंकि विकास कार्य मे की गयी अनियमितता की शिकायत जनहित से जुड़ी हुई चीज है ऐसे मे अगर शिकायत कर्ता बतौर अवसर लाभ उठाना चाहता है तो यह किसी भी रूप मे बेहतर नही हो सकता । लिहाजा उठे सवाल का जबाब वक्त दे या न दे पर वर्तमान को जरूर देना चाहिए । जिसके लिए शिकायत कर्ताओ के बैकग्राउंड को देखना बेहद जरूरी है । बतौर निसबत मिली जानकारी के अनुसार विकास खण्ड सेमरियावा के ग्राम पंचायत बन्नी के शिकायत कर्ता अदील के बैकग्राउंड की बात की जाय तो अदील तीन बार पंचायती चुनाव हार चुका है और अब चौथी बार की तैयारी कर रहा है सूत्रो की माने तो इससे पहले हुए 2015 / 16 के पंचायती चुनाव मे चुनाव जीतने के निसबत मे अदील बीस से बाइस लाख रुपया खर्च किया था । पर चुनाव नही जीता , जीत के करीब होते हुए अठारह वोट से हार गया । वही ग्राम प्रधान जुनैद अहमद की माने तो फोर वीलर गाड़ी का डिमांड है । शिकायत कर्ताओ की हद तब हो गयी जब विकास खण्ड सांथा की ग्राम पंचायत मुड़िला कला मे एक वर्ष पूर्व की गयी अनियमितता की डी पी आर ओ आलोक कुमार प्रियदर्शी द्वारा निस्तारित शिकायत को शिकायत कर्ता निसार अहमद बिना कोई चुनौती दिये तथाकथित मीडिया कर्मी के साथ साठगांठ करके प्रधान के छवि को धूमिल करने का काम करने लगा । इनकी अगर बैकग्राउंड देखी जाय तो इनकी भी शिकायत जनहित को लेकर नही बल्कि प्रधान से जीहुजूरी इन्कम से रहा है सूत्रो के मुताबिक इनका दूसरा पहलू गांजा , चरस , अफीम स्मगलरिंग करने से रहा है जिसका पूरा रिकार्ड पूर्व थाना बखिरा मे है । ग्राम प्रधान मेवालाल विश्वकर्मा की माने तो निज लाभ को देखते हुए अपना सिक्का चलाने से रहा है जो बीते बीस सालो तक चला है । जिनमे ये खुद प्रधान होते हुए भतीजे को प्रधान बनाया । उसके बाद जब वक्त ने करवट बदल लिया तो जनहित की शिकायत को हथियार बना कर वर्तमान ब्लाक प्रमुख सांथा व अध्यापक वीरेन्द्र कन्नौजिया के दस साल के प्रधानी काल मे अपना सिक्का चलाया । ग्राम प्रधान का यह भी कहना है कि निसार अहमद और वीरेंद्र कन्नौजिया दोनो एक ही सिक्के के दो पहलू है । बच्चो के भविष्य से खिलवाड़ करते हुए जहां इनके द्वारा दो सत्र ग्राम पंचायत का प्रतिनिधित्व किया गया वही अब क्षेत्र पंचायत का प्रतिनिधित्व किया जा रहा है ।


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